"ॐ तत्पुरुषाय विद्ध्महे महादेवाय धिमाही तन्नो रूद्र: प्रचोदयात!!!"

लोक भविष्य निधि (PPF )

आपने कई बार PPF का नाम  के बारे में सुना होगा। PPF एक ऐसी योजना हैं जो की भारत सरकार द्वारा आम आदमी के लिए बनाई गयी है।  एक आदमी अपने सम्पूर्ण  जीवन में सिर्फ एक ही खाता खोल सकता हैं।  यह १५ (पंद्रह ) वर्ष की अवधि के लिए है।  

यह एक कर बचत खाता  हैं।  जो सभी भारतीयों के लिए है जो सरकार को कर (टैक्स ) दे रहे हैं।   PPF में  निवेश  करने पर आयकर (INCOME TAX ) की धारा के तहत १५०,००० (रूपये एक लाख पचास हजार ) तक की छूट मिलती है।

इससे EEE का लाभ मिलता है।  E का अर्थ है मुक्त अर्थात निवेश , संचय ,परिपक्वता पर किसी भी तरह की का कर नहीं देना पड़ता है।  यह निवेश कर तथा धन संचय का सबसे बेहतरीन निवेश हैं। 
इसमें वार्षिक ब्याज देय होता हैं।  वर्तमान दर 8.7% वार्षिक हैं।  जो प्रतिवर्ष भारत सरकार द्वारा घोषित की जाती हैं।  न्यूनतम निवेश 500 /- रूपये प्रतिवर्ष है तथा  वर्ष में सिर्फ १२ (बारह ) बार ही निवेश करने की अनुमति हैं। 

उचित समय निवेश के लिए ०१ अप्रैल अथवा किसी भी माह में ०१ से ०४ तारीख के भीतर हैं।  लोक भविष्य निधि में में निवेश  किया हुआ धन किसी भी प्रकार के दायित्व या ऋण के रूप में न्यायलय में पेश नहीं किया जा सकता। 

कई निवेशक सोचते हैं की लम्बा निवेश हैं परन्तु  आपको धन को आवश्यकता है तो आप  पांच वित्तीय वर्ष के उपरांत जमा राशि का ५०% धन आहरित  कर सकते हैं। तथा खाता खोलने के दो वित्तीय वर्ष के बाद जमा राशि का २५% ऋण के रूप में २% वार्षिक दर से ले सकते हैं। ऋण राशि का अधिकाधिक ३६ किश्तों में चूका सकते हैं।  यह खाता डाकघर या किसी भी राष्ट्रिय बैंक में मात्र १०० रुपये के साथ खोला जा सकता हैं।  आशा है की समाज बंधू इस योजना का लाभ लेंगे।  बेहतर उदाहरण  के लिए निचे दी गयी सरणी देखे। 


ज्यादा जानकारी के लिए संपर्क करे। 
लेखक : श्रीमान सदाशिव कश्यप , सिरोही 
ईमेल : ask2us1@gmail.com 


DUKHAD NIDHAN


Shri Sartaneshwar Mahadev lotana , Rajasthan

Shri Sartaneshwar Mahadev lotana,Sirohi ,Rajasthan 


Shree Sartaneshwar Mahadev Mandir, Loatana , Sirohi , Rajasthan 
Lotana Nandiya se 10 km kii duri par hai orr bahot hii khubsurat stahl hai.Waha par late shri Ginaji Rawal kii dhuni bhi hai. 

Sent By :- 
Mr. Ambalal Keshavlal Rawal (Rishi )
Ambaji , Gujrat  

दिवाली

असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक तथा अंधेरों पर उजालों की छटा बिखेरने वाली हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या के दिन पूरे भारतवर्ष में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. इसे रोशनी का पर्व भी कहा जाता है. दीपावली त्यौहार हिन्दुओं के अलावा सिख, बौध तथा जैन धर्म के लोगों द्वारा भी हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाता है. यूं तो इस महापर्व के पीछे सभी धर्मों की अलग-अलग मान्यताएं हैं, परन्तु हिन्दू धर्म ग्रन्थ में वर्णित कथाओं के अनुसार दीपावली का यह पावन त्यौहार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के बाद बनवास के बाद अपने राज्य में वापस लौटने की स्मृति में मनाया जाता है. इस प्रकाशोत्सव को सत्य की जीत व आध्यात्मिक अज्ञानता को दूर करने का प्रतीक भी माना जाता है.
परम्पराओं का त्यौहार दीपावली में मां लक्ष्मी व गणेश के साथ मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है. चूंकि गणेश पूजन के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए लक्ष्मी के साथ विघ्नहर्ता का पूजन भी किया जाता है और धन व सिद्धि के साथ ज्ञान भी पूजनीय है, इसलिए ज्ञान की देवी मां सरस्वती की भी पूजा होती है. इस दिन दीपकों की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए भक्तों को चाहिए कि वह दो थालों में 6 चौमुखे दीपक को रखें और फिर उन थालों को 26 छोटे-छोटे दीपक से सजाएं.
ऐसा विश्वास किया जाता है कि इस दिन यदि कोई श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करता है तो, उसके घर में कभी भी दरिद्रता का वास नहीं होता और वह सदा ही अन्न, धन, धान्य व वैभव से संपन्न रहता है. दीपावली का पर्व समाज में उल्लास, भाई-चारे व प्रेम का सन्देश फैलता है.

धनतेरस

सुख-समृद्धि, यश और वैभव का पर्व धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और मृत्यु के देवता सुर्यपुत्र यमराज की पूजा का बड़ा महत्व है. हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व के बारे में पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन देवताओं के वैद्य धनवंतरी ऋषि अमृत कलश सहित सागर मंथन से प्रकट हुए थे, जिस कारण इस दिन धनतेरस के साथ-साथ धनवंतरी जयंती भी मनाया जाता है. नई चीजों के शुभ कदम के इस पर्व में मुख्य रूप से नए बर्तन या सोना-चांदी खरीदने की परंपरा है. आस्थावान भक्तों के अनुसार चूंकि जन्म के समय धनवंतरी के हाथों में अमृत का कलश था, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदना अति शुभ होता है.
कहा जाता है कि इसी दिन यमराज से राजा हिम के पुत्र की रक्षा उसकी पत्नी ने किया था, जिस कारण दीपावली से दो दिन पहले मनाए जाने वाले ऐश्वर्य का त्यौहार धनतेरस पर सांयकाल को यमदेव के निमित्त दीपदान किया जाता है. इस दिन को यमदीप दान भी कहा जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है और पूरा परिवार स्वस्थ रहता है. चूंकि पीतल भगवान धनवंतरी की धातु मानी जाती है, इसलिए इस दिन पीतल खरीदना भी शुभ माना जाता है. इस दिन घरों को साफ़-सफाई, लीप-पोत कर स्वच्छ और पवित्र बनाया जाता है और फिर शाम के समय रंगोली बना दीपक जलाकर धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी का आवाहन किया जाता है.

शिव तांडव

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